शहीदे आजमभगत सिंह जी के 111 वे जन्म दिवस पर शत् शत् नमन।

सम्पूर्ण विश्व को भारतीय वीरो की निडरता ,साहस और आत्मगौरव का आभास करवाने वाले शहीदे आजमभगत सिंह जी के 111 वे जन्म दिवस पर शत् शत् नमन।

फांसी का झूला झूल गया मर्दाना भगतसिंह, दुनिया को सबक दे गया मस्ताना भगतसिंह।

व्यक्तियों को कुचल कर विचारो को नही मारा जा सकता शहीदे आजम भगत सिंह हो या भाई राजीव दीक्षित इसके प्रत्यक्ष प्रमाण है । भारत के भाग्यविधाता शहीद भगत सिंह जैसे अन्यन्य क्रांतिवीर है जिन्होंने भारत के सुनहरे कल के लिए अपना वर्तमान बलिदान कर दिया।

1924 शहीदे आजमभगत सिंह चंशेखर आजाद द्वारा निर्मित क्रांतिकारी संगठन का हस्तलिखित घोषणा पत्र ।

अंग्रेज भारत को छोड़कर जाए ये हमारे जीवन का पहला लक्ष्य है आखिरी नहीं दूसरा लक्ष्य उससे भी बड़ा है की अंग्रेजियत भारत से जाए अंग्रेजियत मतलब अंग्रेजो द्वारा निर्मित लूट की व्यवस्था। आजादी के बाद भारत स्वावलंबन स्वराज्य के रास्ते पर चलेगा तो हमारी आत्मा को शुकून मिलेगा परंतु आजादी के बाद भारत यदि गुलामी के रास्ते पर चला तो हमारी शहादत बेकार जायेगी।

आजादी तो आ ही जायेगी वो बड़ी बात नहीं है महत्वपूर्ण यह है की आजादी के बाद का भारत कैसा होगा। अतः भारत के नौजवानो से इस बात की अपील है हम तो अपने जीवन जीते जी इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए मर जाएंगे खप जाएंगे लेकिन आने वाली पीढ़ी के नौजवान इन्ही उद्देश्यों की पूर्ति के लिए हमारे बनाये रास्ते पर आते रहे और अपने आप को खपाते रहे और इस देश के लिए न्योछावर होते रहे जब तक पूर्ण स्वराज्य नहीं आ जाता ।

हस्तलिखित क्रांतिवीर चन्द्रशेखर आजाद , भगत सिंह , मन्मतनाथ गुप्त ,सचिन्द्र नाथ लहड़ी ,रामप्रसाद बिस्मिल एवम् ठाकुर रोशन सिंह ।

अन्धकार में समा गए जो तुफानो के बिच जले
मंजिल उनको मिली कभी जो चार कदम भी नहीं चले

शहीदों ने भी ऐसा सोचा होता की ऐसा देश बनेगा तो वो भी शायद शहादत नहीं देते उन्होंने तो ये सोचकर अपने जीवन को बलिदान कर दिया की हम नहीं हमारी आने वाली पीढ़ी इस देश में स्वतंत्रता स्वराज्य का मंजर देखेगी ।शहीदों के सपनो का सम्मान होगा उनके आदर्शो का सम्मान होगा शहीदों के सपनो का भारत बनेगा लेकिन आजादी के 71 वर्ष बाद भी बन नहीं पाया।

क्रांतिवीर आज कैद पड़े है गुमनामी की बाहो में
अंग्रेज लुटरे तने खड़े है दिल्ली के गलियारों में

संवेदनहीन सरकारे आजादी के 71 वर्ष बाद भी अमर शहीदों को संवैधानिक सम्मान तक नहीं दिलवा पाई जिसके वो हकदार थे। वर्तमान भारत में बढ़ रहे अपराध का कारण मजहब नहीं है कारण है गरीबी भय भूख भ्रष्टाचार ,व्यशन नैतिक और चारित्रिक पतन । ये संवेदन शून्य काले अंग्रेज नौजवानो को शराब अश्लीलता परोसकर मीरजाफर और माइकल जेक्सन बनाना चाहते है , जो भारत को बांटने एवम् बेचने में इनका सहयोग कर सके ।

भ्रष्टाचार भारत के खून में नहीं है भ्रष्टाचार अंग्रेजी क़ानून में है आखिर 18 वी सदी के गुलामी के कानूनों से भारत कैसे करेगा 21 वी सदी की चुनौतियों का सामना। पुलिस एक्ट इनकमटैक्स अंग्रेजो का पूरी की पूरी शिक्षा न्याय व्यवस्था अंग्रेजो की यहाँ तक की सर्वोच्च न्यायालय में न्याय भी गुलामी की भाषा में ही मिलता है। 2006 से पुलिस सुधार लंबित है परंतु भारत की किसी भी राज्य सरकार ने पहल नहीं की इस अंग्रेजियत में डूबी व्यवस्था में परिवर्तन करने की ।

अंग्रेजो ने जो नियम क़ानून भारत को लूटने और बर्बाद करने के लिए बनाया था वो आजादी के 71वर्ष बाद भी यथावत चल रहे है जिस पुलिस एक्ट के कारण लाला लाजपत राय की जान गई वो आजाद भारत में आज भी चल रहा है निर्दोष भारतीय आज भी इन अंग्रेजी कानूनों से पीड़ित है आखिर कैसे कहे की देश आजाद हो गया है स्वराज्य आ गया है शहीदों के सपनो का भारत बन गया है । अब तो पुनः व्यवस्थापरिवर्तन की क्रान्ति का समय आ रहा है जो आजादी की जंग जो अधूरी रह गई 15 अगस्त 1947 को उसे पूरा करने का समय है ।

यहाँ शहीदों की पावन गाथाओ को अपमान मिला
अंग्रेज लुटेरो को संसद में भी सम्मान मिला

इंकलाब जिंदाबाद