शिक्षा का बाजार में कॉम्पटीशन

शिक्षा जब बाजार में कॉम्पटीशन बन
जाती है तो विनाश ही लाती है
बचपन से प्रतिभा का नष्ट होना, बचपन से सहजता को खत्म करके , सामूहिक सहायता को पीछे छोड़ते हुए पूरा प्रतियोगी जीवन की ओर जाना, फिर उसी अहम एकम सर्वम को ही जीवन मान लेना ही दुःख लाता है, एकाकी जीवन तनाव लाता है, और फिर अन्य बीमारियों के साथ , समाज में प्रतियोगिता के कारण ईर्ष्या का भाव, एक दूसरे की सहायता का भाव खत्म होता हुआ दिखता है, आज फिर किसी भी तरह के सम्मुख संवाद तकनीकी के नाम पर खत्म हो रहें , दूरियां बढ़ रही है, पर्यावरण और परिवार पुस्तकों और सोशल मीडिया के फोटो में रह गए है। समाधान है सामूहिक सहयोग , समाज पोषित , समाज हित / राष्ट हित से भरी शिक्षा , प्रकृति को साथ जोड़ने वाली विद्या कला आदि , गुरुकुल शिक्षा पद्धति। प्रयास करें आप भी अपने आसपास के लोगों के साथ मिलकर सकारात्मक सोच और व्यवस्थित वातावरण बनाएं।

अभिषेक सेठ
एक स्वदेशी प्रयास!
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