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शहीद अब्दुल हमीद : 86वां जन्मदिवस

  • जन्म: 01 जुलाई 1933 धामूपुर गाँव, गाजीपुर, उत्तर प्रदेश
  • वीरगति: 09 सितंबर 1965 खेमकरन सेक्टर असल उत्तर, तरनतारन, पंजाब

शहीद अब्दुल हमीद का नाम लेते ही आज भी भारतवासियों का सीना गर्व से ऊंचा हो जाता है l उनकी वीरता की कहानियां लोगों की जुबान पर आ जाती है l उनके अदम्य साहस की तस्वीरें खुद-ब-खुद आंखों के सामने तैरने लगती हैं l

वीर अब्दुल हमीद का जन्म एक साधारण दर्जी परिवार में हुआ था। उनकी माता का नाम सकीना बेगम और पिता का नाम मोहम्मद उस्मान था। उनके पिताजी उस्मान फारुखी सेना में लांस नायक पद पर तैनात थे l कम्पनी क्वार्टर मास्टर हवलदार अब्दुल हमीद भारतीय सेना की 4 ग्रेनेडियर में एक सिपाही थे, जिन्होंने 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान खेमकरण सैक्टर के असल उत्तर, तरनतारन (पंजाब) में लड़े गए युद्ध में अद्भुत वीरता का प्रदर्शन करते हुए 32 वर्ष की उम्र में वीरगति प्राप्त की, जिसके लिए उन्हें मरणोपरान्त भारत का सर्वोच्च सेना पुरस्कार परमवीर चक्र मिला। यह पुरस्कार इस युद्ध, जिसमें वे शहीद हुये, के समाप्त होने के एक सप्ताह से भी पहले 16 सितम्बर 1965 को घोषित हुआ। शहीद होने से पहले परमवीर अब्दुल हमीद ने मात्र अपनी “गन माउन्टेड जीप” से उस समय अजय समझे जाने वाले पाकिस्तान के “पैटन टैंकों” को नष्ट किया था।

वीर अब्दुल हमीद ने अपनी “गन माउनटेड जीप” में बैठ कर अपनी गन से पैटन टैंकों के कमजोर अंगों पर एकदम सटीक निशाना लगाकर एक -एक कर धवस्त करना प्रारम्भ कर दिया। उनको ऐसा करते देख अन्य सैनकों का भी हौसला बढ़ गया l देखते ही देखते भारत का असल उत्तर गाँव पाकिस्तानी पैटन टैंकों की कब्रगाह बन गया। 09 सितंबर 1965 को असल उत्तर की लड़ाई में, हामिद ने छह पाकिस्तानी टैंकों को नष्ट कर दिया और सातवें के साथ लड़ाई के दौरान पाकिस्तानियों का पीछा करते अब्दुल हमीद की जीप पर एक गोला गिर जाने से शहीद हो गए l लेकिन उनके शहीद होने की आधिकारिक घोषणा 10 सितम्बर को की गई थी।

इस युद्ध में साधारण “गन माउनटेड जीप” के हाथों हुई “पैटन टैंकों” की बर्बादी को देखते हुए अमेरिका में पैटन टैंकों के डिजाइन को लेकर पुन: समीक्षा करनी पड़ी थी। लेकिन वो अमरीकी “पैटन टैंकों” के सामने केवल साधारण “गन माउनटेड जीप” जीप को ही देख कर समीक्षा कर रहे थे, उसको चलाने वाले वीर अब्दुल हमीद के हौसले को नहीं देख पा रहे थे।

आतंकी इनायत को जिंदा पकड़ा कुख्यात आतंकी इनायत भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश की तो हमीद ने उसका रास्ता रोका l दोनों के बीच कई घंटों तक गोलियां चली l अंतत: हमीद अपनी चतुराई के बल पर उसे जिंदा पकड़ने में कामयाब रहे. उन्होंने उसे अपने सीनियर्स को सौंप दिया था. हमीद की इस बहादुरी का किस्सा इस तरह सराहा गया कि जल्द ही उन्हें सिपाही से लांसनायक बना दिया गया I

एक बार तो शहीद अब्दुल हामिद ने अपने प्राणों की बाजी लगा कर गाँव में आई भीषण बाढ़ में डूबती दो युवतियों की जान बचायी।